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मेरठ3 घंटे पहले

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उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बाद जिला पंचायत चुनाव में भाजपा के सांसद और विधायकों का प्रचार भी समर्थित प्रत्याशियों के काम नहीं आया। वेस्ट यूपी के अधिकांश जिलों में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी है। जिस तरीके से भाजपा की स्थिति कमजोर रही है उसे माना जा रहा है कि किसानों का आक्रोश भी एक कारण है।

5 साल पहले मेरठ में जिला पंचायत के चुनाव में सपा सरकार के दम पर अध्यक्ष पद की कुर्सी सपा के खाते में गई थी। लेकिन जैसे ही प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी तो जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी भी हिल गई। और सत्ता के दम पर भाजपा नेता कुलविंदर गुर्जर अध्यक्ष बन गए।

मेरठ में जिला पंचायत के 33 वार्ड हैं। बसपा को 9 भाजपा को 6, रालोद को 6 सीटें मिली हैं। ऐसे में इस बार भाजपा के लिए अध्यक्ष पद की कुर्सी आसान नहीं है। भाजपा समर्थित प्रत्याशी मीनाक्षी भराला हार गई। यही हाल भाजपा नेता मौजूदा अध्यक्ष के परिवार का रहा। सपा के कद्दावर नेता और प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के परिवार को भी जिला पंचायत सदस्य में सीट नहीं मिली। सपा के दूसरे नेता ओमपाल गुर्जर भी हार गए। मेरठ में भाजपा के एक सांसद राजेंद्र अग्रवाल, दो राज्यसभा सदस्य भी मेरठ के रहने वाले हैं। और इनके अलावा छह विधायक भाजपा के हैं। उसके बाद भी स्थिति कमजोर रही है।

मुजफ्फरनगर में जिला पंचायत सदस्य की 43 सीटों में से भाजपा को 13 सीटें मिली हैं। रालोद के खाते में 3 और बसपा के खाते में 3 सीटें गई हैं। चंद्रशेखर की पार्टी आजाद समाज पार्टी को 6 सीटें मिली हैं। बुलंदशहर में 52 सीटों में से भाजपा को 10 सीटें मिली हैं जबकि 42 पर हार का सामना करना पड़ा है। 23 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। आरएलडी के खाते में 6 और सपा के खाते में 2 सीटें गई हैं बसपा के 10 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। आम आदमी पार्टी को एक सीट मिली।

भाजपा

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वहीं नोएडा में 5 सीटों में से 3 पर भाजपा की जीत हुई है। बागपत में 19 सीटों में भाजपा की स्थिति कमजोर रही है। सहारनपुर में 49 सीटों में से बसपा को 16, भाजपा को 14, कांग्रेस को 8 और आजाद समाज पार्टी को एक व सपा को 5 सीटें मिली हैं। भाकियू को भी एक सीट मिली है। शामली में 19 सीटों में से rld के खाते में 5, बीजेपी को चार, सपा को दो और पॉपुलर फ्रंट को 2 सीटें मिली हैं।

बिजनौर के जिला पंचायत सदस्य भी भाजपा की स्थिति ठीक नहीं रही। यहां सपा को 20, आरएलडी को 4, भाजपा को 8, 9 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत हुई है। झांसी में सपा को 8, भाजपा को 8, बसपा को तीन कांग्रेस को एक, व एक निर्दलीय प्रत्याशी की जीत हुई है। भाजपा की सबसे बुरी हार इटावा में रही है। यहां सपा को 9, और प्रसपा को 8 सीटें मिली हैं। पांच निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत हुई है। भाजपा व बसपा को 11 सीट मिली है।

गाजियाबाद में आरएलडी को 4 बीजेपी को 2, सपा को 4, बसपा के तीन प्रत्याशियों की जीत हुई है। आगरा में भाजपा को 20 तो बसपा को 19 सीटें मिली है। सपा को 5 व आरएलडी के खाते में 1 सीट गई है। मथुरा में जिला पंचायत सदस्यों की 33 सीटों में से भाजपा 8 पर ही सिमट गई। सपा को एक तो बसपा को 13 सीटें मिली हैं। यहां लोकदल के 8 प्रत्याशियों की जीत हुई है।

मुरादाबाद में 39 सीटों में से भाजपा को 10,सपा को 11 बसपा को 12 सीट मिली हैं। मुरादाबाद में कांग्रेस का कोई भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सका। यहां चार निर्दलीय प्रत्याशियों की भी जीत हुई है। बरेली में 60 सीटों में से 27 पर सपा का कब्जा रहा। बसपा 6 पर सिमट गई और बीजेपी 12 पर ही रह गई।

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