नई दिल्ली. आरजेडी (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) पिछले कई दिनों से राष्ट्रीय राजनीति में फिर से सक्रिय होते दिखाई दे रहे हैं. चारा घोटाला मामले में जमानत पर छूटने के बाद लालू यादव दिल्ली में रहे हैं. बीते कुछ दिनों से लालू यादव का कई पुराने राजनेताओं से मिलना-जुलना शुरू हो गया है. हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि लालू प्रसाद यादव किसी रणनीति से मिल रहे हैं या फिर मिलने का मकसद सिर्फ हालचाल जानना ही है. लालू यादव बीते दिनों शरद यादव और मुलायम सिंह यादव से भी मिले हैं. हालांकि, दोनों नेताओं का आज के राजनीतिक दौर में कोई ज्यादा संदर्भ बचा नहीं है. इसके बावजूद लालू यादव की सक्रियता के कई मायने निकाले जा रहे हैं. मीडिया से करते हुए लालू पेगासस, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार की राजनीति पर तो बोल रहे हैं लेकिन, आश्चर्य की बात यह है कि जो लालू अपने अंदाज के लिए जाने जाते थे और बीजेपी, पीएम मोदी और आरएसएस पर अक्सर हमला बोलते थे, वह इस बार दिखाई नहीं दे रहे हैं.

लालू की राजनीति के मायने
जानकारों का मानना है कि लालू यादव यूपीए-1 और यूपीए-2 के वक्त जिस तरह से विपक्षी दलों को एक साथ लाने में मददगार साबित हुए थे, वही राजनीतिक माहौल साल 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले करने का प्रयास में लग गए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि लालू प्रसाद अपने मकसद में कितना कामयाब होंगे?

लालू अपने अंदाज के लिए जाने जाते थे और बीजेपी, पीएम मोदी और आरएसएस पर हमला बोलते थे

बीजेपी के ‘इंडिया शाइनिंग’ के वक्त लालू ने निभाया था अहम रोल
साल 2004 के 14वें लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी की ‘इंडिया शाइनिंग’ का नारा असफल रहा था और कांग्रेस सत्ता में लौटी थी. उस समय कांग्रेस की जीत बीजेपी के लिए जबरदस्त झटका के तौर पर समझा गया था, क्योंकि साल 1999 में जीत के बाद पहली बार बीजेपी अटल बिहारी वाजपेयी ने केंद्र में पांच साल सरकार चलाने में सफलता हासिल की थी. बीजेपी ने साल 1999 का लोकसभा चुनाव ‘विदेशी सोनिया’ बनाम ‘स्वदेशी वाजपेयी’ के नाम पर लड़ा था. वहीं, 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ‘शाइनिंग इंडिया’ और ‘फील गुड’ का नारा दिया था. लेकिन, चुनाव नतीजे आने पर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बनने से इंकार कर दिया और मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने. लालू प्रसाद यादव उस समय देश के रेल मंत्री बने थे.

लालू यादव अपने मकसद में कितना कामयाब होंगे?
बीते कुछ दिनों से लालू यादव की सक्रियता से लगता है कि वह अपने दौर के पुराने नेताओं से सिर्फ कुशलक्षेम जान रहे हैं. पिछले दिनों लालू यादव ने शरद यादव से मुलाकात के बाद मीडिया को बताया, ‘शरद यादव जी की तबीयत के बारे में जानने के लिए आया था. शरद भाई पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे हैं. उनके जैसे नेताओं के बिना संसद सूनी है. शरद भाई, मुलायम सिंह यादव जी और खुद मैं कई मुद्दों पर एक साथ लड़ाई लड़ी है. मुलायम सिंह यादव जी से भी मैंने शिष्टाचार भेंट की है.

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बीते कुछ दिनों से लालू यादव की राजनीति में सक्रियता से लगता है कि वह अपने दौर के पुराने नेताओं से सिर्फ कुशलक्षेम जान रहे हैं.

लालू की चुप्पी के राज
गौरतलब है कि लालू यादव पेगासस और हाल ही में बिहार विधानसभा के चुनावों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. अपने बेटे तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार पर भी उन्होंने बोला है, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि लालू प्रसाद अपने जिस अंदाज के लिए जाने जाते हैं वह अंदाज अभी तक दिखाई नहीं दिया है. 2014 से पहले तक वह पीएम मोदी पर जमकर बोलते थे. आरएसएस और बीजेपी पर भी खूब चुटकी लेते थे, लेकिन इतना राजनीतिक गहमागहमी के बाद भी वह अब तक न तो पीएम मोदी और न ही आरएसएस के बारे में कुछ बोला है.

क्या कहते हैं जानकार
वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘लालू यादव बहुत तेज राजनेता हैं. उन्होंने पहले जो गलती की थी, उसको अब दोहराना नहीं चाहते हैं. एक तो इसका कारण उनका स्वास्थ्य है और दूसरा वक्त. लालू यादव वक्त के हिसाब से बात करने का लहजा बदलते रहते हैं. नीतीश कुमार से लेकर पीएम मोदी तक लालू यादव के निशाने पर रहे हैं. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि ये वही लालू यादव हैं, जो चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी पर निशाना साधते हुए यह कहने से नहीं थकते थे कि बीजेपी को बिहार से नथनी पहनाकर भेजेंगे. पीएम मोदी के बारे में तो कालिया नाग से लेकर कंस तक कह दिया था, लेकिन मौजूदा राजनीति परिस्थिति में वह फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. लालू यादव का स्वास्थ्य अगर ठीक रहा तो वह पलटवार करने का जबरदस्त क्षमता है.’

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लालू यादव की राजनीति में फिर से दिलचस्पी का असर बिहार में भी दिखाई देगा?

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ऐसे में कह सकते हैं कि लालू यादव की राजनीति में फिर से दिलचस्पी का असर बिहार में भी दिखाई देगा. इसी खतरा को भांपते हुए बिहार के कद्दावर बीजेपी नेता सुशील मोदी ने लालू यादव की जमानत रद्द करने की बात कर रहे हैं. सुशील मोदी ने लालू कि रिहाई के वक्त ट्वीट कर कहा था कि लालू जमानत का फायदा स्वास्थ्य लाभ कर उठाएं. लालू यादव राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहें तो उनके लिए अच्छा रहेगा. लेकिन, लालू की राजनीति में सक्रियता ने सुशील मोदी, सीएम नीतीश कुमार और ललन सिंह जैसे नेताओं की नींद उड़ सकती है, क्योंकि दिल्ली में रहने के बाद भी उनकी सियासी दांव-पेंच की रणनीति कई नेताओं की नींद उड़ रखी है.

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