बिहार में बीजेपी-जेडीयू में ठनी, सम्राट अशोक और शराबबंदी पर तू-तू मैं-मैं जारी

पटना. बिहार में सत्ताधारी दल बीजेपी-जेडीयू में तलवारें खिंच गई हैं. दोनों दल के नेता एक दूसरे को नीचा दिखाने में जुटे हैं. यूं कहें कि बिहार में विपक्ष का काम बीजेपी ही पूरी कर दी रही है. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल अपने दल की तरफ से मोर्चा संभाले हुए हैं. यह सब कुछ एक लेखक द्वारा सम्राट अशोक की तुलना औरंगजेब से करने पर शुरू हुई है. विवाद की शुरूआत जेडीयू की तरफ से हुई. जेडीयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह एवं संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशाहा ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया. साथ ही बीजेपी से उस साहित्यकार को दल से निकालने की मांग कर दी. इसके बाद तो सत्ता पक्ष के दोनों दल आपस में उलझ गये हैं.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने सरकार की पूरी तरह पोल खोल कर रख दी है. संजय जायसवाल के सवाल उठाने पर जेडीयू की तरफ से प्रवक्ता अभिषेख झा ने उन्हें गिरबां में झांकने की सलाह दे दी. साथ ही उनके आचरण पर सवाल खड़े किये थे.

जेडीयू प्रवक्ता ने कहा था कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जयसवाल जी, आप आत्मचिंतन कीजिए और अपने गिरेबां में झांक कर देखिए कि बीते एक वर्ष में आपने एनडीए गठबंधन के खिलाफ कितने बयान दिए हैं? यदि स्मरण ना हो तो सभी बयानों का संकलन करके आपको भेजा जा सकता है. शराबबंदी सरकार की नीति रही है, लेकिन जहरीली शराब पीने से आपके लोकसभा क्षेत्र में जब कुछ लोगों की मृत्यु हुई थी, आप संवेदना व्यक्त करने और सांत्वना स्वरूप पैसे बांटने गए थे. एनडीए सरकार की नीति के हिसाब से आपका यह आचरण सही था या गलत?

आज बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने जेडीयू प्रवक्ता के बहाने नीतीश सरकार की शराबबंदी की पोल खोल कर रख दी है. ऐसे कहें कि सरकार को पानी-पानी कर दिया है. संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पेज पर जेडीयू को जवाब दिया है. बीजेपी ने लिखा- आज मुझे पता चला कि जदयू  प्रवक्ता अभिषेक झा मेरे लोकसभा क्षेत्र में जहरीली शराब के कारण हुए मृत्यु पर मेरे जाने पर मुझसे जवाब मांग रहे हैं. जदयू के प्रवक्ता का मुझसे सवाल करना बताता है कि यह सवाल जदयू के द्वारा है क्योंकि प्रवक्ता दल की बातें रखता है अपनी व्यक्तिगत नहीं.

संजय जायसवाल ने कहा कि मैं अभिषेक झा को बता दूं कि मैं जहरीली शराब से हुई मौतों के परिवारजनों के घर गया था और अगर भविष्य में भी कभी मेरे लोकसभा क्षेत्र में इस तरह की दुर्घटना घटेगी तो मैं हर हालत में जाऊंगा और आर्थिक मदद भी करुंगा. अगर कोई व्यक्ति जहरीली शराब से मरता है तो उसने निश्चित तौर पर अपराध किया है, पर इससे प्रशासनिक विफलता के दाग को बचाया नहीं जा सकता और जब मैं इस शासन के एक घटक का अध्यक्ष हूं तो यह मेरी भी विफलता है.

दिल्ली से कोई परिवार दार्जिलिंग छुट्टियां मनाने जा रहा है और उसकी गाड़ी में बिहार में एक बोतल शराब पकड़ी गई और उस परिवार की गाड़ी नीलाम हो जाती है. ऐसी कम से कम 5 घटनाएं मैं व्यक्तिगत तौर पर जानता हूं. 10 वर्ष के जेल का प्रावधान केवल उन पुलिस अधिकारियों के लिए होना चाहिए जिन्होंने नीतीश कुमार जी के इतने अच्छे सामाजिक सोच को नुकसान पहुंचाया है. अगर मेरी बात समझ में नहीं आ रही हो तो मीडिया की दुनिया से बाहर जाकर अपने पंचायत के किसी भी आम व्यक्ति से संपर्क कर लें. आपको शराबबंदी और पुलिस की भूमिका अच्छे से समझ में आ जाएगी.

बीजेपी अध्यक्ष संजय जायसवाल ने जब सुशासन की पोल खोल कर रखी तो फेस बचाने फिर से जेडीयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने जवाब दिया. जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि आपके लंबे प्रवचन का जवाब देने का कोई अर्थ नहीं है. 12 जनवरी को आपने एक बयान जारी किया था. उस दिन आपने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को कमजोर करने वाली बात कही थी. आज भी आपने एक बयान जारी किया है. दोनों बयानों में इतना विरोधाभास है कि यही आपका राजनीतिक आचरण उजागर करता है.

आपके शहर से (पटना)

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