बिहार में 52% लोग गरीब, झारखंड दूसरे और यूपी देश में तीसरे नंबर पर- नीति आयोग

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NITI Aayog : नीति आयोग ने शुक्रवार को देश के गरीब राज्यों की लिस्ट जारी की. बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) में बिहार, झारखंड और यूपी सबसे गरीब राज्यों के रूप में सामने आए हैं. बिहार में कुपोषितों की संख्या भी सबसे ज्यादा है. स्कूली शिक्षा समेत दूसरे कई मानकों में भी बिहार की स्थिति फिसड्डी रही है.

सूचकांक के अनुसार, बिहार की 51.91 प्रतिशत जनसंख्या गरीब हैं. देश के सबसे गरीब राज्यों में बिहार पहले नंबर पर है. दूसरे नंबर पर झारखंड है. झारखंड में 42.16 प्रतिशत और यूपी में 37.79 प्रतिशत आबादी गरीबी में रह रही है. सूचकांक में मध्य प्रदेश (36.65 प्रतिशत) चौथे स्थान पर है, जबकि मेघालय (32.67 प्रतिशत) 5वें स्थान पर है. केरल (0.71 प्रतिशत),  गोवा (3.76 प्रतिशत), सिक्किम (3.82 प्रतिशत), तमिलनाडु (4.89 प्रतिशत) और पंजाब में (5.59 प्रतिशत) लोग गरीब हैं. पूरे देश में इन राज्यों में सबसे कम गरीब हैं. 

दिल्ली, लक्ष्यद्वीप और अंडमान निकोबार ने किया बेहतर प्रदर्शन
केंद्र शासित प्रदेशों में, दादरा और नगर हवेली में (27.36 प्रतिशत), जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में (12.58 प्रतिशत),  दमन एवं दीव (6.82 प्रतिशत) और चंडीगढ़ (5.97 प्रतिशत) देश के सबसे गरीब केंद्र शासित प्रदेश हैं. पुडुचेरी की 1.72 प्रतिशत आबादी गरीब है. इसके अलावा लक्षद्वीप में (1.82 प्रतिशत), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में (4.30 प्रतिशत) और दिल्ली में (4.79 प्रतिशत) गरीब हैं. लक्ष्यद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और दिल्ली ने इस बार बेहतर प्रदर्शन किया है.

बिहार में सबसे ज्यादा कुपोषित
बिहार में कुपोषितों की संख्या भी सबसे ज्यादा है. इसके बाद झारखंड, मध्यप्रदरेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ का स्थान है. मातृत्व स्वास्थ्य से वंचित आबादी का प्रतिशत,  स्कूली शिक्षा से वंचित आबादी,  स्कूल में उपस्थिति और खाना पकाने के ईंधन तथा बिजली से वंचित आबादी के प्रतिशत के मामले में भी बिहार का सबसे खराब स्थान है.

ऐसे तैयार हुआ है सूचकांक
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव (OPHI) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा विकसित विश्व स्तर पर स्वीकृत और मजबूत पद्धति का उपयोग कर तैयार किया जाता है. बहुआयामी गरीबी सूचकांक में मुख्य रूप से परिवार की आर्थिक हालात और अभाव की स्थिति को आंका जाता है.

इन पॉइंट्स का किया गया है मूल्यांकन
एमपीआई में 3 पॉइंट्स स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन के स्तर का मूल्यांकन किया गया. पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, प्रसव पूर्व देखभाल, स्कूली शिक्षा के वर्ष,  स्कूल में उपस्थिति,  खाना पकाने के ईंधन,  स्वच्छता, पीने के पानी,  बिजली,  आवास,  संपत्ति तथा बैंक खाते जैसे 12 पॉइंट्स के जरिए मूल्यांकन किया जाता है. नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा कि एमपीआई को 12 प्रमुख घटकों का उपयोग करके तैयार किया गया.

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